
पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। यह महीना भगवान Lord Vishnu को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस महीने में पूजा, जप, दान और भक्ति करने से कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है।
पुरुषोत्तम मास का महत्व
मान्यता है कि इस महीने में की गई भक्ति और पुण्य कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए लोग इस समय आत्मशुद्धि, पूजा-पाठ और अच्छे कर्मों पर अधिक ध्यान देते हैं।
1. भगवान विष्णु का प्रिय महीना
पुराणों के अनुसार जब अधिक मास को कोई महत्व नहीं दे रहा था, तब Lord Vishnu ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम” दिया। तभी से यह महीना अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाने लगा।
2. भक्ति और आत्मशुद्धि का समय
यह महीना:
- मन को शांत करने,
- बुरी आदतें छोड़ने,
- और भगवान की भक्ति में समय देने
के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
3. कई गुना पुण्य फल
मान्यता है कि इस महीने में:
- दान,
- व्रत,
- मंत्र जाप,
- गीता पाठ,
- भजन-कीर्तन
का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है।
4. पापों से मुक्ति

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास में सच्चे मन से पूजा करने पर व्यक्ति के पाप कम होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
5. मोक्ष प्राप्ति का मार्ग
कहा जाता है कि इस महीने में की गई सच्ची भक्ति व्यक्ति को मोक्ष के मार्ग की ओर ले जाती है।
पुरुषोत्तम मास में विशेष क्या करें?

- Bhagavad Gita का पाठ
- विष्णु सहस्रनाम का जाप
- गरीबों को दान
- सात्विक भोजन
- सुबह-शाम दीपक जलाना
- मंदिर दर्शन और भजन
क्या नहीं करना चाहिए?
- क्रोध और झूठ
- मांस-मदिरा सेवन
- किसी का अपमान
- बिना जरूरत विवाद
- परंपरा अनुसार शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य
धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि जो व्यक्ति पुरुषोत्तम मास में श्रद्धा और नियम से भगवान Lord Vishnu की पूजा करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
पुरुषोत्तम मास क्या है?
पुरुषोत्तम मास को अधिक मास भी कहा जाता है। यह लगभग हर 3 साल में एक बार आता है। हिंदू पंचांग में चंद्र मास और सौर मास के अंतर को संतुलित करने के लिए यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।
इस महीने को भगवान Lord Vishnu को समर्पित माना जाता है, इसलिए इसे “पुरुषोत्तम मास” कहा जाता है।
मान्यता है कि इस महीने में पूजा, जप, दान और भक्ति करने से कई गुना अधिक फल मिलता है।
पुरुषोत्तम मास में क्या करना चाहिए?
1. भगवान विष्णु की पूजा
- रोज सुबह स्नान करके Lord Vishnu और Lakshmi की पूजा करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
2. गीता और रामायण पाठ
- Bhagavad Gita का पाठ शुभ माना जाता है।
- Ramcharitmanas या विष्णु सहस्रनाम पढ़ सकते हैं।
3. दान-पुण्य करें

- गरीबों को भोजन, कपड़े, अनाज आदि दान करें।
- गाय, पक्षियों और जरूरतमंदों की सेवा करना शुभ माना जाता है।
4. व्रत और सात्विक भोजन

- कई लोग इस महीने में व्रत रखते हैं।
- प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा से दूर रहकर सात्विक भोजन करें।
5. भजन-कीर्तन
- भगवान के भजन सुनना और करना बहुत शुभ माना जाता है।
पुरुषोत्तम मास में क्या नहीं करना चाहिए?
1. नए शुभ कार्यों से बचें
परंपरा अनुसार इस महीने में:
- शादी-विवाह
- गृह प्रवेश
- मुंडन
- नया व्यवसाय शुरू करना
जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
2. झूठ और क्रोध से बचें
- किसी का अपमान न करें।
- क्रोध, ईर्ष्या और बुरे विचारों से दूर रहें।
3. तामसिक भोजन न करें
- मांस, शराब, नशा आदि से बचना चाहिए।
4. किसी को दुख न दें
- जीवों को कष्ट देना अशुभ माना जाता है।
पुरुषोत्तम मास का महत्व
मान्यता है कि इस महीने में की गई भक्ति और पुण्य कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए लोग इस समय आत्मशुद्धि, पूजा-पाठ और अच्छे कर्मों पर अधिक ध्यान देते हैं।
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